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  क्या दे त्यौहारों में (गीत)

 

  दे सकें शुभकामनाएँ आज क्या त्यौहारों में
विष भरी मुस्कान मिलती प्रेम के उपहारों में
दे सकें शुभकामनाएँ ……………………………

दीपों में जो तेल संजोया मौत बना करता है
दीवाली का उजियारा भी तमस घना करता है
दिल कटे दीवार से हर आज के परिवारों में
दे सकें शुभकामनाएँ………………………

कैसे खेले फाग जहाँ रंग गिरगिट से मिलते हैं
फूल नही अपने कमरों में नागफनी खिलते हैं
आदमी तक बिक रहा है आज के बाज़ारों में
दे सके शुभकामनाएँ…………………………

पीर पराई भूल गया जग पथ काँटे बोये हैं
कैसे स्वागत करे अयोध्या जब राम ही सोये हैं
पाप का कद बहुत ऊँचा आज के दरबारों में
दे सके शुभकामनाएँ……………………………
 
     
 
 
 

कवितायें :

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