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आजा ना, आजा ना, साजन जी घर आजा ना


 

 

आजा ना, आजा ना, साजन जी घर आजा ना

वरना सावन में ओ साजन सखियाँ मारेंगी ताना

आजा ना, आजा ना

 

खन-खन खनके कंगना मेरे बिंदिया करे इशारे

ओ मेरे जीवन के चंदा आजा मेरे द्वारे

सांझ की लाली बोले साजन तुम बिन घर ये बेगाना

आजा ना, आजा ना

 

अधरों की खामोशी हँसती तो आंखें भर आती

तकिये की बेचैनी और ये रातें मुझे डराती

दर्पण सूना-सूना लागे भूल गया ये इतराना

आजा ना, आजा ना

 

तुम बिन फीकी मेरी होली अरमानों की रोली

भूल गये तुम जाकर सजना सखियाँ मेरी बोली

इतने दिन तक न आने का तुम कारण समझा जाना

आजा ना, आजा ना

 

पिहू-पिहू पपीहा बोले और बादल घिर-घिर आये

बारिश पूरे यौवन पर भी मुझे भींगो न पाये

मन की तपती रेत पे सजना प्रेम सुधा तुम बरसाना

आजा ना, आजा ना


 
     
 
 
 

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