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तेरा प्यार नौका सा हिचकोले खाता है
मेरा प्यार नदिया सा बढ़ता ही जाता है
तेरा प्यार नौका सा
थोड़ी सी ऊँची लहरों से जो है घबराती
वो कश्ती अपने साहिल तक पँहुच नहीं पाती
पर्वत और चट्टानों से जो राह बनाती है
वो नदिया खारे सागर से भी मिलने जाती है
हाँ प्यार में तो पागल मन को सब भाता है
तेरा प्यार नौका सा
रोम-रोम सागर में नदिया यूं घुल जाती है
नदी न रहती बूँद-बूँद सागर कहलाती है
लहरें बन-बन कर वो जब-जब तट तक आती है
रेत भी नम हो-हो कर उसकी यादें गाती है
पर चैन उसे सागर में खो कर आता है
तेरा प्यार नौका सा
नदिया से यों प्यार निभाता है सागर का जल
खुश हो कर वो तपता रहता बन जाता बादल
बादल बन सारी धरती पर सदा बरसता है
कण-कण भींग प्यार में सबका जीवन हँसता है
हाँ हरियाली का पानी से गहरा नाता है
तेरा प्यार नौका सा |