मुख्य पृष्ठ | परिचय | कविता | मुक्तक | मेरी कलम से | दिशा  (NGO)  | कृतियां | चित्र दीर्घा

स्नेह वाणी | प्रैस | संपर्क | प्रतिक्रिया | विशेष सूची मे जोड़े | मित्र को बतायें | Videos New

 

 
 

मेरा प्यार नदिया सा


 

 

तेरा प्यार नौका सा हिचकोले खाता है

मेरा प्यार नदिया सा बढ़ता ही जाता है

तेरा प्यार नौका सा

 

थोड़ी सी ऊँची लहरों से जो है घबराती

वो कश्ती अपने साहिल तक पँहुच नहीं पाती

पर्वत और चट्टानों से जो राह बनाती है

वो नदिया खारे सागर से भी मिलने जाती है

हाँ प्यार में तो पागल मन को सब भाता है

तेरा प्यार नौका सा

 

रोम-रोम सागर में नदिया यूं घुल जाती है

नदी न रहती बूँद-बूँद सागर कहलाती है

लहरें बन-बन कर वो जब-जब तट तक आती है

रेत भी नम हो-हो कर उसकी यादें गाती है

पर चैन उसे सागर में खो कर आता है

तेरा प्यार नौका सा

 

नदिया से यों प्यार निभाता है सागर का जल

खुश हो कर वो तपता रहता बन जाता बादल

बादल बन सारी धरती पर सदा बरसता है

कण-कण भींग प्यार में सबका जीवन हँसता है

हाँ हरियाली का पानी से गहरा नाता है

तेरा प्यार नौका सा

 
     
 
 
 

कवितायें :

सरस्वती-वंदना | बेटियाँ | माँ | पिता घर |  एस॰एम॰एस॰ व ई मेल | तुम सिर्फ एक जुगनू हो | औरत

 
   

मैं तेरे नाम का अब भी दीया जलाती हूँ | जूही की कली सी याद | आजा ना, आजा ना, साजन जी घर आजा ना

रचने वाले कैसे तूने हमको रचाया है | इंतजार | प्रेम | नदी, सागर और वर्षा | इंसानियत की पैकिंग में शैतानियत

मेरा प्यार नदिया सा | आधे-अधूरे लोग

 

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2006 | RITUBASANT.COM 

Site by : ICS