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तरबूज खरीदने को लगी थी भीड़
एक-एक करके तोल रहा था
तरबूज वाला तरबूजे
कोई कह रहा था बस पांच किलो से ज्यादा मत
देना
घर में चार तो प्राणी हैं कौन से बारात
जिमानी है
दूसरा बोला, अरे ! वह दो छोटा सा छाँट कर
मीठा है कि नहीं दिखाओ काट कर
एक महिला थकी हारी खड़ी थी
बड़ा क्यूं तोल दिया इस बात पे अड़ी थी
कह रही थी नौकरी पे जाते है पति-पत्नी
सांझ ढले लौट कर आते हैं घर
ज्यादातर होटल से आता है डिनर
बड़ा तरबूज घर कैसे ले जाऊंगी
दफ्तर की थकन उपर से भारी तरबूज उठाऊँगी
एक आदमी बच्चे के साथ था
बच्चे के हाथ में थे आइसक्रीम और चिप्स
पिज्जा बर्गर खाने वाला बच्चा क्या जाने फल
के फायदे और टिप्स
फिर एक वृद्ध महिला सामने आई
मैंने सोचा अबकी तरबूज बड़ा बिकेगा
दादी पूरे परिवार को एक साथ खिलायेगी
तरबूज की मिठास औ’
तरलता के बारे में बतायेगी |
पर उसने भी केवल दो किलो का ही तरबूज लिया
क्योंकि डालर के प्यारे हो चुके थे उसके
अपने
वृद्ध विधवा के पथरा चुके थे सारे सपने
एक देहाती आया वहीं तरबूज कटा कर खाने लगा
शायद उसे गांव का बगीचा याद आने लगा
इसी तरह छोटे-छोटे तरबूज बिकते रहे
बड़े शहर के आधे-अधूरे आदमी दिखते रहे
फिर एक नौजवान आया
सबसे बड़ा तरबूज मांगने लगा
क्योंकि उसके घर में थे ताऊ-ताई, चाचा-चाची
और दादा-दादी
उस परिवार के बीसो लोग तरबूज खाने के थे
आदी
नौजवान गर्व से बोला
मैं नहीं थकता भारी तरबूज उठाने से
क्योंकि मैं अब भी संयुक्त परिवार के
संस्कार जी रहा हूँ
रोज़ अपनी दादी के हाथों से बना तरबूज का
जूस पी रहा हूँ
अंततः मैंने भी तुलवा लिया तीन किलो का
तरबूज
पर घर आकर जब काटने लगी उसे
तरबूज मुझे बहुत छोटा नज़र आने लगा
और अचानक वहीं नौजवान
एक हरे-भरे वृक्ष पर बैठा मुझे मुँह चिढ़ाने
लगा
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