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सरस्वती-वंदना


 

 

हंसवाहिनी, ज्ञानदायिनी, तमहारिणी तुमको प्रणाम

 

चौसठ कलाओं से सुशोभित कर रही हो ये धरा

सप्त सुरों में गूंजती हो अर्द्धांगिनी ब्रह्म की स्वरा

स्वरदायिनी, वीणावादिनी, वरदायिनी तुमको प्रणाम

 

ज्योतिर्मयी तुम ज्ञान से कलुषित मन को पखारतीं

एक छंद माँ सरस्वती शब्द बाण से तम काटतीं

शब्ददायिनी, मृदुभाषिणी, शुभकारिणी तुमको प्रणाम

 

विद्वान के माथे पे तुम तकदीर बन कर शोभतीं

जड़मति होते सुजान जब बंधनों को तोड़तीं

विद्यादायिनी, छंददायिनी, ब्रह्मनादिनी तुमको प्रणाम


 

     
 
 
 

कवितायें :

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