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घर


 

 

घर तो घर होता है आखिर घर तो घर होता है

 

चाहे जितना ऊँचा उड़ ले पंछी घर आता है

चाहे दर-दर खा लें ठोकर घर ही अपनाता है

तिनकों से नीड़ तक का, घर लम्बा सफर होता है

घर तो घर होता है आखिर घर तो घर होता है

 

घर भाई-बहनों की राखी बाबा की लाठी है

आंधी-तूफाँ सब सह ले ज्यों माँ सी कद काठी है

घाव कितना भी गहरा हो मरहम सा असर होता है

घर तो घर होता है आखिर घर तो घर होता है

 

आंगन से आकाश की बातें, बारिश की टप-टप है

छोटे-छोटे बच्चों की भी खूब बड़ी गप-शप है

धरती पे उतर आया परियों का नगर होता है

घर तो घर होता है आखिर घर तो घर होता है

 

चूड़ी, बिंदिया, पायल, कंगना आंखों की भाषा है

घर बंज़ारे मन की सबसे गहरी अभिलाषा है

बेघरों के लिए हर पल बेगाना शहर होता है

घर तो घर होता है आखिर घर तो घर होता है


 
     
 
 
 

कवितायें :

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