मुख्य पृष्ठ | परिचय | कविता | मुक्तक | मेरी कलम से | दिशा  (NGO)  | कृतियां | चित्र दीर्घा

स्नेह वाणी | प्रैस | संपर्क | प्रतिक्रिया | विशेष सूची मे जोड़े | मित्र को बतायें | Videos New

 

 
 

गीत


 

  अपनेपन की गंध से कैसी दुर्गंध आई
हाय हमदम ही मेरा बन गया हरजाई
अपनेपन की गंध से…………………
जिन आँखो में हरदम दिखी, बस मेरी तस्वीर थी
मेरी खातिर थी खुशी, मेरी खातिर पीर थी
आज उन नज़रों ने ही मुझसे नज़रे चुराई
अपनेपन की गंध से…………………
ना अधर में वो तपन है, ना मिलन की प्यास है
मौन काजल पूछता अब क्यूं छला विश्वास है
तन के खोलूँ पट मगर मन को बहला न पाई
अपनेपन की गंध से…………………
प्यार की उष्मा अचानक हो गई तेज ज्वर
अब छुअन में वो दवा सा न रहा कोई असर
खारे जल ने क्या किसी प्यासे की प्यास बुझाई
अपनेपन की गंध से…………………

 

     
 
 
 

कवितायें :

सरस्वती-वंदना | बेटियाँ | माँ | पिता घर |  एस॰एम॰एस॰ व ई मेल | तुम सिर्फ एक जुगनू हो | औरत

 
   

मैं तेरे नाम का अब भी दीया जलाती हूँ | जूही की कली सी याद | आजा ना, आजा ना, साजन जी घर आजा ना

रचने वाले कैसे तूने हमको रचाया है | इंतजार | प्रेम | नदी, सागर और वर्षा | इंसानियत की पैकिंग में शैतानियत

मेरा प्यार नदिया सा | आधे-अधूरे लोग | महिला आरक्षण | न्यूज़ चैनल की खबरें | दीदी | झांसी की रानी की प्रतिम

गीत-1 | गीत-2  | हिन्दी–वंदना | कली कथा | सावन उनसे जाके कहना रे | क्या दे त्यौहारों में

 

 

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2006 | RITUBASANT.COM 

Site by : ICS