मुख्य पृष्ठ | परिचय | कविता | मुक्तक | मेरी कलम से | दिशा  (NGO)  | कृतियां | चित्र दीर्घा

स्नेह वाणी | प्रैस | संपर्क | प्रतिक्रिया | विशेष सूची मे जोड़े | मित्र को बतायें | Videos New

 

 
 

दीदी


 

  ताउम्र
दीदी के चेहरे पर कभी नहीं
दिखती थी हंसी
शायद ही देखी हो उन्होंने
कभी कोई खुशी
पर
जब भी मैं उनसे मिलती
या फोन पर बात करती
मुझे अवश्य हिदायत देतीं
चिंता मत करना ‘खुश रहा करो’
उदास मत होना ‘हंसती रहा करो’
जब भी मन उदास हो
या मन में कोई बात हो
मुझसे सब कह लेना
मन हल्का हो जायेगा
इस तरह
अपनी बची खुची हिम्मत भी
मुझमें भर देतीं थी वे
जानें प्यार भरी बातों से कैसा
जादू कर देतीं थी वे
इसीलिए मेरा अभ्यस्त मन

अब भी फोन बुक में
दीदी के नाम से सेव उनका
नंबर मैं जब तब मिला देती हूं
और दीदी
सिर्फ मुझे खुश करने, हौसला भरने
फोन स्वर्ग लोक से भी
उठा लिया करतीं हैं
और यह शाश्वत सत्य और भी सत्य हो जाता है
कि दो बहनें हमेशा निस्वार्थ अपना सुख दुख
बाँटा करतीं हैं
एक दूज़े के घांव भरती हैं
हाँ बेशक अब दीदी नहीं हैं
पर हम घंटों बतियाते हैं
फर्क बस इतना है
पहले हम दोनों के पते अलग थे
फोन नंबर अलग थे
किन्तु अब हम एक हैं
वे मुझमें
और
मैं उनमें
जी रही हूं

     
 
 
 

कवितायें :

सरस्वती-वंदना | बेटियाँ | माँ | पिता घर |  एस॰एम॰एस॰ व ई मेल | तुम सिर्फ एक जुगनू हो | औरत

 
   

मैं तेरे नाम का अब भी दीया जलाती हूँ | जूही की कली सी याद | आजा ना, आजा ना, साजन जी घर आजा ना

रचने वाले कैसे तूने हमको रचाया है | इंतजार | प्रेम | नदी, सागर और वर्षा | इंसानियत की पैकिंग में शैतानियत

मेरा प्यार नदिया सा | आधे-अधूरे लोग | महिला आरक्षण | न्यूज़ चैनल की खबरें | दीदी | झांसी की रानी की प्रतिम

गीत-1 | गीत-2  | हिन्दी–वंदना | कली कथा | सावन उनसे जाके कहना रे | क्या दे त्यौहारों में

 

 

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2006 | RITUBASANT.COM 

Site by : ICS