मुख्य पृष्ठ | परिचय | कविता | मुक्तक | मेरी कलम से | दिशा  (NGO)  | कृतियां | चित्र दीर्घा

स्नेह वाणी | प्रैस | संपर्क | प्रतिक्रिया | विशेष सूची मे जोड़े | मित्र को बतायें | Videos New

 

 
 

बेटियाँ


 

 

बेटियाँ गुलज़ार होती हैं

बेटियाँ बस प्यार होती हैं

बेटियाँ घर छोड़ जाती जब

खुशियॉ सब उस पार होती हैं

बेटियों से हर घड़ी पावन

बेटियों से ज़िन्दगी सावन

 

बेटियों के सुर ही तन-मन में

प्राण बन के बसे होते हैं

बेटियाँ घर-घर की वीणाएँ

तार जिनके  कसे होते हैं

गूँजती फिर भी मधुरता बन

बेटियाँ संगीत मनभावन

बेटियों से ज़िन्दगी सावन

 

धूप से हरदम बचाएँ जो

बेटियाँ वो छाँव होती हैं

झूमते दिन रात पेड़ों के

नृत्य करते पाँव होती हैं

बेटियों से महकता उपवन

बेटियों से घर हैं वृंदावन

बेटियों से ज़िन्दगी सावन

बेटियाँ जब जन्म लेती हैं

जन्म दे क्यूं माएं रोती हैं

बेटियों को कोख में मारे

बेटियों से दुनिया होती हैं

रुक गई जो इनकी ही धड़कन

रच सकोगे क्या धरा नूतन

बेटियों से ज़िन्दगी सावन

 

देह धर कर आ गया है जो

बेटी नयनों का वहीं सपना

सपना वो जो सबसे अपना है

फिर भी वो होता नहीं अपना

छोड़ जाती खुशबू तन-मन की

बेटियाँ हैं या हैं ये चन्दन

बेटियों से ज़िन्दगी सावन

 

बेटियाँ मधुमास होती हैं

दूर हो के पास होती हैं

बेटे घर के दीप हैं माना

बेटियाँ अरदास होती हैं

जो सदा करती जहां रोशन

बेटियाँ हैं भोर का वंदन

बेटियों से ज़िन्दगी सावन

     
 
 
 

कवितायें :

सरस्वती-वंदना | बेटियाँ | माँ | पिता घर |  एस॰एम॰एस॰ व ई मेल | तुम सिर्फ एक जुगनू हो | औरत

 
   

मैं तेरे नाम का अब भी दीया जलाती हूँ | जूही की कली सी याद | आजा ना, आजा ना, साजन जी घर आजा ना

रचने वाले कैसे तूने हमको रचाया है | इंतजार | प्रेम | नदी, सागर और वर्षा | इंसानियत की पैकिंग में शैतानियत

मेरा प्यार नदिया सा | आधे-अधूरे लोग

 

सर्वाधिकार सुरक्षित © 2006 | RITUBASANT.COM 

Site by : ICS